दीपावली पर पटाखे फोड़ने की परंपरा का इतिहास और विकास लेखक: रोहित सिंह चौहान 1. धार्मिक ग्रंथों में प्रमाण का अभाव: दिवाली पर पटाखे जलाने का उल्लेख किसी धार्मिक ग्रंथ में नहीं मिलता। हालांकि, दीप जलाने की परंपरा पौराणिक कथाओं में वर्णित है, लेकिन आतिशबाजी का कोई धार्मिक आधार नहीं है। 2. मुगलकाल में बारूद का प्रवेश: भारत में बारूद का आगमन मुगलों के साथ हुआ। बाबर ने युद्ध में बारूद का इस्तेमाल किया, और इसे प्रारंभिक आतिशबाजी की शुरुआत के रूप में देखा जा सकता है। 3. चीन से प्रसार: पटाखों का आविष्कार 7वीं शताब्दी में चीन में हुआ था। चीन में पटाखों का शोर बुरी आत्माओं को भगाने के लिए किया जाता था। वहां से यह प्रथा धीरे-धीरे अन्य देशों में पहुंची। 4. विजयनगर साम्राज्य में आतिशबाजी: 1443 में विजयनगर साम्राज्य के राजा देवराय द्वितीय के समय अब्दुर रज्जाक ने महानवमी उत्सव में आतिशबाजी का उल्लेख किया, जो भारत में आतिशबाजी के सबसे पुराने प्रमाणों में से एक है। 5. दिल्ली सल्तनत के दौरान आतिशबाजी: 1351-88 में सुल्तान फिरोज तुगलक के समय दिल्ली में शब-ए-बारात पर आतिशबाजी का वर्ण...
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