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भारत के प्रमुख भौगोलिक उपनाम

भारत के प्रमुख भौगोलिक उपनाम
1. ईश्वर का निवास स्थान - प्रयाग

2. पांच नदियों की भूमि -पंजाब

3. सात टापुओं का नगर- मुंबई

4. बुनकरों का शहर- पानीपत

5. अंतरिक्ष का शहर बेंगलुरू

6. डायमंड हार्बर -कोलकाता

7. इलेक्ट्रॉनिक नगर -बेंगलुरू

8. त्योहारों का नगर -मदुरै

9. स्वर्ण मंदिर का शहर -अमृतसर

10. महलों का शहर कोलकाता

11. नवाबों का शहर- लखनऊ

12. इस्पात नगरी -जमशेदपुर

13. पर्वतों की रानी -मसूरी

14. रैलियों का नगर -नई दिल्ली

15. भारत का प्रवेश द्वार मुंबई

16. पूर्व का वेनिस- कोच्चि

17. भारत का पिट्सबर्ग -जमशेदपुर

18. भारत का मैनचेस्टर- अहमदाबाद

19. मसालों का बगीचा -केरल

20. गुलाबी नगर- जयपुर

21. क्वीन ऑफ डेकन- पुणे

22. भारत का हॉलीवुड -मुंबई

23. झीलों का नगर -श्रीनगर

24. फलोद्यानों का स्वर्ग -सिक्किम

25. पहाड़ी की मल्लिका -नेतरहाट

26. भारत का डेट्राइट -पीथमपुर

27. पूर्व का पेरिस- जयपुर

28. सॉल्ट सिटी- गुजरात

29. सोया प्रदेश -मध्य प्रदेश

30. मलय का देश- कर्नाटक

31. दक्षिण भारत की गंगा- कावेरी

32. काली नदी- शारदा

33. ब्लू माउंटेन - नीलगिरी पहाड़ियां

34. एशिया के अंडों की टोकरी - आंध्र प्रदेश

35. राजस्थान का हृदय - अजमेर

36. सुरमा नगरी - बरेली

37. खुशबुओं का शहर -कन्नौज

38. काशी की बहन -गाजीपुर

39. लीची नगर देहरादून

40. राजस्थान का शिमला -माउंट आबू

41. कर्नाटक का रत्न -मैसूर

42. अरब सागर की रानी -कोच्चि

43. भारत का स्विट्जरलैंड -कश्मीर

44. पूर्व का स्कॉटलैंड- मेघालय

45. उत्तर भारत का मैनचेस्टर - कानपुर

46. मंदिरों और घाटों का नगर - वाराणसी

47. धान का डलिया- छत्तीसगढ़

48. भारत का पेरिस -जयपुर

49. मेघों का घर -मेघालय

50. बगीचों का शहर- कपूरथला

51. पृथ्वी का स्वर्ग -श्रीनगर

52. पहाड़ों की नगरी- डुंगरपुर

53. भारत का उद्यान -बेंगलुरू

54. भारत का बोस्टन -अहमदाबाद

55. गोल्डन सिटी -अमृतसर

56. सूती वस्त्रों की राजधानी - मुंबई

57. पवित्र नदी -गंगा

58. बिहार का शोक -कोसी

59. वृद्ध गंगा- गोदावरी

60. पश्चिम बंगाल का शोक- दामोदर

61. कोट्टायम की दादी- मलयाला

62. जुड़वा नगर --हैदराबाद- सिकंदराबाद

63. ताला नगरी -अलीगढ़

64. राष्ट्रीय राजमार्गों का चौराहा- कानपुर

65. पेठा नगरी -आगरा

66. भारत का टॉलीवुड- कोलकाता

67. वन नगर -देहरादून

68. सूर्य नगरी -जोधपुर

69. राजस्थान का गौरव- चित्तौड़गढ़

70. कोयला नगरी -धनबाद  

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मेरे नाना जी एक ऐसे शांत व्यक्तित्व थे, जिनके जीवन में न कभी लड़ाई थी, न झगड़ा, न द्वेष। उनके लिए कोई पराया नहीं था— हर इंसान अपना था। हर किसी से उनका व्यवहार सरल, सच्चा और आदर से भरा होता था। हर जगह, हर परिस्थिति में सबका भला चाहने वाली सोच ही उनकी पहचान थी। न उन्होंने कभी किसी की चुगली की, न किसी की निंदा। न ही किसी के कान भरकर किसी के प्रति मन में ज़हर बोया। आज सोचता हूँ— ऐसा इंसान बनना कितना कठिन होता है, जो पूरी ज़िंदगी दूसरों के लिए जी जाए, पर अपने लिए कभी कुछ न माँगे। मेरे नाना जी सिर्फ़ रिश्ते में नाना नहीं थे— वो मेरे दोस्त थे, मेरे गुरु थे। जब मैं सिर्फ़ दो साल का था, तभी से मैं उनके पास रहने लगा। उन्हीं की उँगली पकड़कर चलना सीखा, उन्हीं की छाया में बड़ा हुआ। शायद इसी कारण मेरा सबसे गहरा लगाव सिर्फ़ उन्हीं से था, किसी और से नहीं। नाना जी, आपसे मैंने जो सीखा है, आपने जो भी मुझे सिखाया है— वो संस्कार मैं जीवन भर याद रखूँगा। न किसी से लड़ाई, न झगड़ा, न बैर। जो हमारे बारे में गलत सोचते हैं, जो हमारा भला नहीं चाहते— उनकी बातों को नज़रअंदाज़ कर अपने कर्म और अपने रास्ते ...

पता नहीं ऐसा क्या था

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