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विटामिन तथा उनके रासायनिक नाम

विटामिन तथा उनके रासायनिक नाम
 👉 विटामिन - A
रासायनिक नाम : रेटिनाॅल
कमी से रोग: रतौंधी
स्त्रोत : 🥕गाजर,🥛 दूध, 🥚अण्डा,🍓फल🍉

 👉 विटामिन – B1
रासायनिक नाम: थायमिन
कमी से रोग: बेरी-बेरी
स्त्रोत : 🥜मुंगफली, आलू, 🥦सब्जीयाँ🍆

 👉 विटामिन – B2
रासायनिक नाम: राइबोफ्लेबिन
कमी से रोग: त्वचा फटना, आँख का रोग
स्त्रोत : 🥚अण्डा,🥛 दूध,🥦 हरी सब्जियाँ

 👉 विटामिन – B3
रासायनिक नाम: पैण्टोथेनिक अम्ल
कमी से रोग: पैरों में जलन, बाल सफेद
स्त्रोत :🍗 मांस🍖,🥛 दूध, 🍅टमाटर, मुँगफली🥜

 👉 विटामिन - B5
रासायनिक नाम: निकोटिनेमाइड (नियासिन)
कमी से रोग: मासिक विकार (पेलाग्रा)
स्त्रोत : 🍗मांस🍖, 🥜मूंगफली, आलू

 👉 विटामिन - B6
रासायनिक नाम: पाइरीडाॅक्सिन
कमी से रोग: एनीमिया, त्वचा रोग
स्त्रोत : 🥛दूध, 🍗मांस,🥦 सब्जी🍆

 👉 विटामिन – H / B7
रासायनिक नाम: बायोटिन
कमी से रोग: बालों का गिरना , चर्म रोग
स्त्रोत : यीस्ट, गेहूँ, 🥚अण्डा

 👉 विटामिन – B12
रासायनिक नाम: सायनोकोबालमिन
कमी से रोग: एनीमिया, पाण्डू रोग
स्त्रोत : 🍗मांस, 🍖कजेली, 🥛दूध

 👉 विटामिन - C
रासायनिक नाम: एस्कार्बिक एसिड
कमी से रोग: स्कर्वी, मसूड़ों का फुलना
स्त्रोत : आँवला, 🍋नींबू, 🍑संतरा, 🍊नारंगी

 👉 विटामिन – D
रासायनिक नाम: कैल्सिफेराॅल
कमी से रोग: रिकेट्स
स्त्रोत :☀ सूर्य का प्रकाश,🥛 दूध, अण्डा🥚

 👉 विटामिन – E
रासायनिक नाम: टेकोफेराॅल
कमी से रोग: जनन शक्ति का कम होना
स्त्रोत: 🥦हरी सब्जी, 🍚मक्खन, दूध🥛

 👉 विटामिन- K
रासायनिक नाम: फिलोक्वीनाॅन
कमी से रोग: रक्त का थक्का न बनना
स्त्रोत: 🍅टमाटर, 🥦हरी सब्जियाँ, 🥛दूध

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एक ऐसा शांत व्यक्तित्व नाना जी का

मेरे नाना जी एक ऐसे शांत व्यक्तित्व थे, जिनके जीवन में न कभी लड़ाई थी, न झगड़ा, न द्वेष। उनके लिए कोई पराया नहीं था— हर इंसान अपना था। हर किसी से उनका व्यवहार सरल, सच्चा और आदर से भरा होता था। हर जगह, हर परिस्थिति में सबका भला चाहने वाली सोच ही उनकी पहचान थी। न उन्होंने कभी किसी की चुगली की, न किसी की निंदा। न ही किसी के कान भरकर किसी के प्रति मन में ज़हर बोया। आज सोचता हूँ— ऐसा इंसान बनना कितना कठिन होता है, जो पूरी ज़िंदगी दूसरों के लिए जी जाए, पर अपने लिए कभी कुछ न माँगे। मेरे नाना जी सिर्फ़ रिश्ते में नाना नहीं थे— वो मेरे दोस्त थे, मेरे गुरु थे। जब मैं सिर्फ़ दो साल का था, तभी से मैं उनके पास रहने लगा। उन्हीं की उँगली पकड़कर चलना सीखा, उन्हीं की छाया में बड़ा हुआ। शायद इसी कारण मेरा सबसे गहरा लगाव सिर्फ़ उन्हीं से था, किसी और से नहीं। नाना जी, आपसे मैंने जो सीखा है, आपने जो भी मुझे सिखाया है— वो संस्कार मैं जीवन भर याद रखूँगा। न किसी से लड़ाई, न झगड़ा, न बैर। जो हमारे बारे में गलत सोचते हैं, जो हमारा भला नहीं चाहते— उनकी बातों को नज़रअंदाज़ कर अपने कर्म और अपने रास्ते ...

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