शिक्षक और अभिभावक: शिक्षा में जागरूकता और जिम्मेदारी की आवश्यकता
हमारे समाज में अक्सर सरकारी शिक्षकों की आलोचना की जाती है और निजी स्कूल के शिक्षकों की प्रशंसा होती है। यह समझना जरूरी है कि सरकारी शिक्षक एक कठिन प्रक्रिया और मानक परीक्षणों को पार कर अपनी नौकरी तक पहुँचते हैं। सबसे पहले बी.एड. के लिए प्रवेश परीक्षा देंगे, फिर दो साल तक पढ़ाई करेंगे, उसके बाद टीईटी और सीटीईटी जैसे कठिन परीक्षाएँ पास करेंगे। इन सबके बाद भी उनकी नौकरी की निश्चितता नहीं होती; उन्हें आयोग की परीक्षा भी पास करनी होती है।
सरकारी नौकरी में भी शिक्षकों के कार्य शिक्षा तक सीमित नहीं रहते। कभी जनगणना की जिम्मेदारी, कभी चुनावी ड्यूटी, कभी मतदाता पहचान पत्र बनाने का काम - ऐसे कई कार्यों में उन्हें सरकार की ओर से लगा दिया जाता है। इसके बावजूद वे छात्रों को पढ़ाने, उनका पाठ्यक्रम पूरा कराने और स्कूल का समुचित प्रबंधन देखने का काम भी करते हैं। इसके बाद भी उन्हें आलोचना का सामना करना पड़ता है कि "हमारे बच्चे नहीं पढ़ते।"
वास्तव में, इसमें माता-पिता की भूमिका महत्वपूर्ण है। अगर बच्चा पढ़ाई में रुचि नहीं लेता तो माता-पिता को भी अपने हिस्से की जिम्मेदारी समझनी होगी। निजी स्कूल के अभिभावक बच्चों की शिक्षा के प्रति अधिक जागरूक रहते हैं और अपनी जिम्मेदारी निभाते हैं, जबकि कई माता-पिता बच्चों को बस स्कूल भेज देना ही अपनी जिम्मेदारी मान लेते हैं। स्कूल चाहे सरकारी हो या निजी, किताबें तो एक जैसी ही हैं, बच्चों के बैग एक जैसे हैं, और वे कपड़े पहन कर ही स्कूल जाते हैं। फिर भी सरकारी शिक्षा व्यवस्था को दोष देना गलत है। सरकार छात्रों को मुफ्त में भोजन, कपड़े और जूते तक देती है, फिर भी दोष सरकारी शिक्षक या व्यवस्था पर मढ़ा जाता है।
अभिभावकों को चाहिए कि वे अपनी भूमिका निभाएं और बच्चों को घर पर पढ़ने के लिए प्रेरित करें। शिक्षा की गुणवत्ता का पूर्ण विकास तभी होगा, जब माता-पिता भी बच्चों की शिक्षा के प्रति उतनी ही जागरूकता दिखाएंगे जितनी कि शिक्षक।
सच है, कुछ शिक्षक अपनी जिम्मेदारी को समझने में चूक करते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि सभी दोषी हैं। हमें सभी सरकारी शिक्षकों को एक ही नज़र से देखना बंद करना चाहिए और समाज में शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ानी चाहिए।
सरकारी और निजी स्कूलों में गुणवत्ता का अंतर समाप्त करने के लिए जरूरी है कि अभिभावक भी अपनी जिम्मेदारी निभाएं और शिक्षकों का सम्मान करें।
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