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हिमाचल प्रदेश में बड़ा भ्रष्टाचार मामला

हिमाचल प्रदेश में बड़ा भ्रष्टाचार मामला: सिरमौर की अश्याड़ी पंचायत में प्रधान समेत 5 वार्ड सदस्य सस्पेंड सिरमौर, हिमाचल प्रदेश – जिला सिरमौर के विकास खंड शिलाई में स्थित ग्राम पंचायत अश्याड़ी में भ्रष्टाचार का एक बड़ा मामला सामने आया है, जिसमें पंचायत प्रधान अनिल कुमार सहित 5 वार्ड सदस्य सस्पेंड कर दिए गए हैं। पंचायत के विकास कार्यों में करीब 63 लाख रुपये से अधिक की वित्तीय अनियमितताओं की पुष्टि के बाद जिला प्रशासन ने यह कदम उठाया है। 
क्या है पूरा मामला?
ग्राम पंचायत अश्याड़ी में पिछले कुछ वर्षों में मनरेगा और अन्य योजनाओं के तहत कई विकास कार्यों का संचालन किया गया था, जिनमें मोक्षधाम, सिंचाई कूहल, सामूहिक रास्ता, लिंक रोड, एंबुलेंस लिंक रोड, भू-संरक्षण कार्य, वायर क्रेट निर्माण, और चैकडैम जैसी परियोजनाएं शामिल थीं। स्थानीय निवासियों द्वारा इन कार्यों में अनियमितताओं की शिकायत डीसी सिरमौर से की गई थी, जिसके बाद प्रारंभिक जांच का जिम्मा खंड विकास अधिकारी शिलाई को सौंपा गया।जांच में पाया गया कि पंचायत विकास कार्यों के लिए आवंटित धनराशि का दुरुपयोग हुआ है। 6 सितंबर 2024 को प्राप्त प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में पंचायती धनराशि के अनुचित उपयोग का मामला सामने आया, जिसमें प्रथम दृष्टया प्रधान सहित 5 अन्य वार्ड सदस्य दोषी पाए गए।


कौन-कौन हुआ सस्पेंड?
इस मामले में सस्पेंड किए गए सदस्यों में:
1. पंचायत प्रधान अनिल कुमार
2. वार्ड-1 सदस्य सुषमा देवी
3. वार्ड-2 सदस्य प्रदीप सिंह
4. वार्ड-3 सदस्य कमलेष देवी
5. वार्ड-4 सदस्य चंद्र कला
6. वार्ड-5 सदस्य खजान सिंह

जिला पंचायत अधिकारी अभिषेक मित्तल ने इन सस्पेंशनों की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि सभी निलंबित सदस्यों को पहले कारण बताओ नोटिस भी जारी किया गया था, लेकिन उनका जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया।पंचायतों में मचा हड़कंपइस घटना ने पूरे जिला सिरमौर में हड़कंप मचा दिया है, खासकर पंचायती राज संस्थाओं में। यह राज्य का पहला ऐसा मामला है, जिसमें एक ही पंचायत के प्रधान और सभी वार्ड सदस्यों को एक साथ सस्पेंड किया गया है। इस कार्रवाई से राज्य सरकार के भ्रष्टाचार विरोधी अभियान को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

आगे क्या?
जिला प्रशासन द्वारा मामले की गहन जांच की जा रही है। भविष्य में और अधिक कड़ी कार्रवाई के संकेत दिए जा रहे हैं, ताकि पंचायत स्तर पर भ्रष्टाचार के मामलों को रोका जा सके और पारदर्शिता को बढ़ावा दिया जा सके।

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