Skip to main content

बचाऐं राशनकार्ड बंद होने से राशनकार्ड eKYC ऐसे करें

राशन कार्ड की eKYC कैसे करें?
जैसा कि आप जानते हैं, अब राशन कार्ड की eKYC करवाना बहुत जरूरी हो गया है। अगर आपने समय पर eKYC नहीं करवाई तो आपका राशन कार्ड बंद हो सकता है और आपको राशन मिलना बंद हो जाएगा। पहले इसके लिए आपको अपने डिपो पर जाकर eKYC करवानी पड़ती थी, लेकिन अब आप घर बैठे ही अपने मोबाइल से अपनी और अपने परिवार के किसी भी सदस्य की eKYC आसानी से कर सकते हैं।

eKYC करने की प्रक्रिया:

1. मोबाइल ऐप इंस्टॉल करें:

अपने मोबाइल के प्ले स्टोर पर जाएं।

सर्च बार में टाइप करें "eKYC PDS HP"।

इस ऐप को डाउनलोड और इंस्टॉल करें।

2. ऐप खोलें:

ऐप को ओपन करें।

यहां आपको राशन कार्ड या आधार कार्ड नंबर दर्ज करने का विकल्प मिलेगा।

इनमें से किसी एक को दर्ज करें।


video Link : https://youtu.be/qOFPQzyg36A?si=JcjkYVFlAwYVxEUJ

3. परिवार के सदस्यों की जानकारी देखें:

आपकी पूरी परिवार की जानकारी ऐप में दिखाई देगी।

जिन सदस्यों की eKYC नहीं हुई है, उनके नाम पर क्लिक करें।



4. eKYC पूरी करें:

मांगी गई जानकारी दर्ज करें।

प्रक्रिया पूरी करें और सुनिश्चित करें कि सभी सदस्यों की eKYC हो चुकी है।


https://youtu.be/qOFPQzyg36A?si=JcjkYVFlAwYVxEUJ

महत्वपूर्ण सूचना:

eKYC पूरी होने के बाद ही आपका राशन कार्ड सक्रिय रहेगा।

अधिक जानकारी के लिए अपने नजदीकी डिपो या खाद्य आपूर्ति विभाग से संपर्क करें।


इस तरह, आप अपने राशन कार्ड को बंद होने से बचा सकते हैं और समय पर राशन प्राप्त कर सकते हैं।
For more information see video click the link below :
https://youtu.be/qOFPQzyg36A?si=JcjkYVFlAwYVxEUJ

Comments

Popular posts from this blog

एक ऐसा शांत व्यक्तित्व नाना जी का

मेरे नाना जी एक ऐसे शांत व्यक्तित्व थे, जिनके जीवन में न कभी लड़ाई थी, न झगड़ा, न द्वेष। उनके लिए कोई पराया नहीं था— हर इंसान अपना था। हर किसी से उनका व्यवहार सरल, सच्चा और आदर से भरा होता था। हर जगह, हर परिस्थिति में सबका भला चाहने वाली सोच ही उनकी पहचान थी। न उन्होंने कभी किसी की चुगली की, न किसी की निंदा। न ही किसी के कान भरकर किसी के प्रति मन में ज़हर बोया। आज सोचता हूँ— ऐसा इंसान बनना कितना कठिन होता है, जो पूरी ज़िंदगी दूसरों के लिए जी जाए, पर अपने लिए कभी कुछ न माँगे। मेरे नाना जी सिर्फ़ रिश्ते में नाना नहीं थे— वो मेरे दोस्त थे, मेरे गुरु थे। जब मैं सिर्फ़ दो साल का था, तभी से मैं उनके पास रहने लगा। उन्हीं की उँगली पकड़कर चलना सीखा, उन्हीं की छाया में बड़ा हुआ। शायद इसी कारण मेरा सबसे गहरा लगाव सिर्फ़ उन्हीं से था, किसी और से नहीं। नाना जी, आपसे मैंने जो सीखा है, आपने जो भी मुझे सिखाया है— वो संस्कार मैं जीवन भर याद रखूँगा। न किसी से लड़ाई, न झगड़ा, न बैर। जो हमारे बारे में गलत सोचते हैं, जो हमारा भला नहीं चाहते— उनकी बातों को नज़रअंदाज़ कर अपने कर्म और अपने रास्ते ...

पता नहीं ऐसा क्या था

मैं बचपन से ही ज़्यादातर समय माँ‑पापा के पास नहीं, अपने नाना जी के पास रहा। पता नहीं ऐसा क्या था उनमें, कि वो ही मुझे सबसे ज़्यादा अपने लगे। कभी‑कभी सोचता हूँ— क्या हमारे बीच सिर्फ़ इस जन्म का रिश्ता था, या कोई बहुत पुराना, शायद पौराणिक सा संबंध था, जो शब्दों में नहीं बंधता। आज मैं 33 वर्ष का हो गया हूँ, पर बचपन से लेकर आज तक मुझे याद नहीं पड़ता कि नाना जी ने कभी मुझे डाँटा हो। बच्चे को डाँटना तो आम बात है, और 3‑4 साल से 30‑31 साल तक किसी भी उम्र में यही होता है। पर नाना जी ने कभी ऐसा नहीं किया। यहाँ तक कि कभी ऊँची आवाज़ में भी मुझसे बात नहीं की। उन्होंने हमेशा समझाया, सिखाया— किसी का बुरा मत करना, किसी के बारे में गलत मत बोलना। उनकी हर सीख में शांति और सच्चाई होती थी। नाना जी, आपसे मैंने जो सीखा है, आपने जो भी मुझे सिखाया है— वो संस्कार मैं जीवन भर याद रखूँगा। न किसी से लड़ाई, न झगड़ा, न बैर। जो हमारे बारे में गलत सोचते हैं, जो हमारा भला नहीं चाहते— उनकी बातों को नज़रअंदाज़ करना और अपने कर्म और अपने रास्ते पर ध्यान देना। आप कहा करते थे— “जिसकी सोच जितनी होती है, वो उतना ही...

HPU MA History Date sheet