बहुत समय पहले की बात है, जब समाज में जात-पात, ऊँच-नीच, और भेदभाव का बोलबाला था। लोग अंधविश्वास में फंसे हुए थे और सच्ची भक्ति का मार्ग भूल चुके थे। ऐसे समय में, पंजाब के तलवंडी गाँव में 1469 ई. में एक दिव्य आत्मा का जन्म हुआ, जिन्हें हम गुरु नानक देव जी के नाम से जानते हैं। उनके पिता का नाम कालू मेहता और माता का नाम तृप्ता देवी था। गुरु नानक बचपन से ही साधारण बच्चों की तरह नहीं थे। वे हमेशा ईश्वर में लीन रहते और सत्संग व भक्ति में समय बिताते थे। उनका मन संसारिक चीजों में नहीं लगता था। उन्होंने छोटी उम्र में ही यह बता दिया कि वे साधारण मानव नहीं हैं, बल्कि एक दिव्य पुरुष हैं। एक बार जब उनके पिता ने उन्हें व्यापार करने के लिए कुछ पैसे दिए, तो गुरु नानक जी ने उन पैसों से भूखे साधुओं और गरीबों को भोजन करा दिया। उन्होंने इसे "सच्चा सौदा" कहा, यानी सच्चा व्यापार। एक और घटना में, जब गुरु नानक जी नदी में स्नान करने गए, तो वे कई दिनों तक बाहर नहीं आए। सब लोग चिंतित हो गए, लेकिन जब वे लौटे, तो उन्होंने एक महत्वपूर्ण संदेश दिया: "ना कोई हिंदू है, ना मुसलमान, सब एक ईश्वर...
Provide study meterial for all types of Himachal Pradesh exams, we wish you do work hard and achieve your success.